Race of Technology vs Human Life
एक दिन हम वापस उसी जगह आएंगे जहा से हम गुजरे हैं. Introduction आज की भागती हुई दुनिया में Technology एक ऐसी अंधी race बन चुकी है जिसकी कोई finish line नहीं है। हर सुबह एक नया Gadget , एक नया App , या AI (Artificial Intelligence) का कोई नया update हमारे सामने आ जाता है। हमें बताया जाता है कि यह हमारी life को better और आसान बना देगा। हमारे living room का TV अब एक computer बन चुका है, garage में खड़ी cars robots बन चुकी हैं, और internet हमारी सोच तक को influence करने लगा है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक बहुत गहरा और कड़वा सवाल छिपा है: अगर हमारी जिंदगी का हर फैसला कोई machine या algorithm ही लेने लगे, तो इंसान के सच में जिंदा होने का एहसास कहाँ बचेगा? सच यह है कि हर इंसान की एक limit होती है और हर technology की भी एक कीमत होती है। जब कोई चीज़ अपनी हद पार कर जाती है, तो इंसान का दिमाग अपने आप सुकून तलाशने लगता है। एक दिन ऐसा आएगा जब इस digital कचरे, fake content और लगातार बढ़ते Screen Time से थककर इंसान फिर अपनी जड़ों की तरफ मुड़ेगा। हम technology की इस ऊँचाई से घूम...