इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है
दुनिया बदलने की शुरुआत अक्सर वहीं से होती है, जहाँ हम किसी एक अनजान इंसान का दर्द अपना समझ लेते हैं। सिर्फ़ भीख देना समाधान नहीं, बल्कि किसी को भीख माँगने की आवश्यकता ही न पड़े, यही सबसे बड़ा प्रयास है। उनसे बचने की बजाय अगर हम उन्हें ऐसा करने देने से बचाने की कोशिश करेंगे, तो ज्यादा अच्छे नतीजे आएंगे। अगर कोई भी व्यक्ति इस प्रकार स्टेशन या मंदिरों में मिलते हैं, तो सबसे पहली चीज़ हमें अपना नज़रिया उनके लिए सम्मानजनक रखना चाहिए, क्योंकि आखिर है तो वो भी इंसान ही। बस उन्हें वैसा उनके हालातों ने, अन्य समस्याओं ने बनाया होगा। जब भी हमें ऐसा कोई दिखे, तो उन्हें कुछ पैसे देने की बजाय हम उन्हें खुद खाना खिलाकर, उन्हें कहीं भी कोई भी ऐसा कार्य दिला सकते हैं, जिससे ऐसे लोग सशक्त हो सकें। क्योंकि शिक्षा, अर्थ और जीविका के उचित साधनों की आवश्यकता उन्हें भी होती है। हम जिस समाज में खुद को शिक्षित और सभ्य मानकर चलते हैं, उसी समाज में एक वर्ग इस प्रकार की दयनीय स्थिति का सामना कर रहा होता है। और हद तब होती है, जब हमें उन्हें नफरत और घृणा की दृष्टि से देखना सीखा दिया जाता है। और ये सब दे...