.उसमें रब है, उसमें सब है, वो खुदा भी है, और खुदा की रज़ा है, माना हर अदा कला नहीं है, पर हर कला में अदा है।,यें उस रब की 'रज़ा' हैं जिसका अपना ही मज़ा है,हर पल को महसूस करना, हर पल को जीना,सबकुछ आर्ट तो नहीं, लेकिन आर्ट में क्या नहीं, आर्ट में 'सब' भले ना हो हो, लेकिन आर्ट 'सब' में जरूर होता है।
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