#Thats_it :- do no let the rape again. PART-2
अभी जितने भी रेप केस हुए है ,एक के बाद,फिर एक के बाद इससे इन्तहा हो गयी है न्याय के लिए जो सब्र था वो अब देशवाशियो का पूरी तरह टूट चूका है क्यूंकि अब बिलकुल; एक भी और नहीं ...बहुत हो चूका , जितनी भी लडकियों के साथ रेप हुआ उनमे से ज्यादातर का केस आज भी लंबित है और उन्हें अभी तक न्याय नही मिला , तो सवाल है आखिर कब तक उन्हें न्याय के लिए इन्तेजार करना होगा , हाल ही में दिशा के अपराधियों का १० दिन में एनकाउंटर कर दिया गया , जिससे कही न कही देश के लोगो ने कम से कम चैन की एक सास तो ली होगी , ये एक बहुत ही शानदार एक्शन था जिस तरह रेपिस्ट लडकियों को उसी जगह पर बिना देर किये जला देते है इन्हें भी उसी तरह तुरंत जलाकर मार देना चाहिए ताकि दोबारा फिर कोई रेप के बारे में सोच भी ना सके |
दिशा को तो इन्साफ मिल गया लेकिन क्या दिशा को असली इन्साफ मिला, मुझे सच में थोडा सुकून मिला जब पता चला की दिशा के आरोपियों को देर से ही सही पर उन्हें एनकाउंटर से मार दिया गया हलाकि उन्हे इतनी आसन मौत नही देनी चाहिए थी , अब तो बस समय आ चूका है की इन हैवानो को जिनके कारण देश की बेटिया खौफ खाती है उन्हें रेप टेररिस्ट घोषित किया जाय और उसी तरह मार दिया जाय जिस तरह भारतीय सेना आतंकवादियों को देखते ही मार देती है , लेकिन क्या दिशा को सच में न्याय मिला क्या एक रेप के आरोपियों का एनकाउंटर कर चैन की सांस ली जा सकता है , क्या इतने से रेप होना बंद हो जायेगा , क्या इससे रेप पीड़ित लड़की को इन्साफ मिल गया , बिलकुल नहीं , निर्भया केस को ७ साल हो चुके है आखिर इतने सालो में उसे जस्टिस क्यों नहीं मिला ?
कोई भी लड़की ये नही चाहेगी की जिस दर्द से वो होकर गुजरी ऐसा फिर कभी किसी के साथ हो , निश्चित रूप से जब तक सभी आरोपियों को उचित सज़ा अर्थात मौत नही मिल जाती , जब तक एक ऐसा protective सिस्टम develop नही किया जाता जिससे ये रेप केस होने बंद हो तब तक किसी भी लड़की को सच्चा न्याय शायद नही मिलेगा ,मै पहले भी कह चूका हु और अब भी यही कह रहा हूँ की जब तक इसे पूरी तरह समझकर इसका एक पूर्ण समाधान नही निकाल लिया जाता, जब तक इसके खिलाफ कड़े से कड़े स्टेप नही लिए जाते तब तक ऐसी घटनायें स्टॉप नही हो जाती तब तक न दिशा को न्याय मिलेगा ना निर्भया को , हम मनोवैज्ञानिक रूप से अपने घर में समाज में एक ऐसा वातावरण तैयार करे जिससे कोई भी युवा अपनी सोच इतनी घृणित ना करे , १३० करोड़ की जनसँख्या है हमारे देश में कौन किसके बारे में क्या सोच रहा है यह कोई नही जानता, न ही लडकियों को उनके रहन में बदलाव के लिए मजबूर किया जा सकता है क्यूंकि ऐसा होना भी नही चाहिए , मेरे कहने का अर्थ ये है की अगर हमारे सामाज में अच्छी सुरक्षा व्यवस्था होगी , कड़े प्रावधान होंगे , पुरुषो द्वारा हर महिला को सुरक्षा व सम्मान देने की कर्तव्यनिष्ठ भावना होगी और आजकल के youths की मानसिकता को हम जितनी सही दिशा देंगे सिर्फ रेप ही क्यों बाकी अन्य तरह के अपराध निश्चित ही कम हो सकेगी |
आज तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है , शिक्षा का प्रतिशत और स्तर इतना ऊपर उठ चुका हमारा सामाज और हर एक व्यक्ति जब आज इतना जागरूक हो रहा है तो आखिर ऐसी क्या कमी है की रोज हमारे ही बीच से हमारे हि आसपास से ऐसी घतनाय सामने आ जाती है , | आखिर कुछ तो कमी होगी ,कुछ तो बुरा है तभी तो इतने अपराध हो रहे है इस बात ने हम सभी को सोचने पर मजबु किया है की एक लेडी डॉक्टर जो की स्वयं इतनी साक्षर और सशक्त थी यदि उनके साथ ऐसा हो सकता है तो इस देश में कुछ भी हो सकता है , और इसका जिम्मेदार कौन दरिंदो के बुलंद हौसले और उसे हमारे हि समाज में पनाह देती कमजोर व्यवथा , और सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढाओ टैग की कमजोर धुंदली हकीकत |
हमारे देश में देवी माना जाता है महिलाओं को, मगर आज देश की बेतिया ये चीख चीख कर अपील कर रही है सरकार से और मानवता से की उन्हें देवी मत बनाओ , सिर्फ सुरक्षा और सम्मान ही दे दो , अजीब भी तो ही न की एक लड़का जिसे रक्षाबंधन के दिन उसकी बहन सुरक्षा और प्यार के रिश्ते के लिए राखी बांधती है वही भाई और की बहन के साथ ऐसा दुष्कर्म करता जिसे सोचकर ही सिहरन पैदा होती है| अब बहुत हो चुका ....#thats it. सिर्फ अपराधियों को ख़त्म नही करना है ,अपराधिक मानसिकता का एनकाउंटर करना है , ताकि उनका अगला शिकार कोई न हो | तब यक़ीनन देश में वो बदलाव आयेगा जिस आप और मै देखना चाहते है|
और अंत में :- किसी लड़की या महिला की सुरक्षा के लिए उसे सिर्फ बहन या दोस्त , gf बनाना ही जरुरी नहीं है, कहते है हर रिश्ते में कोई न कोई स्वार्थ होता है, क्यों ना हम उन्हें अपनी बहन बनाये बिना ही उनसे रिश्ता निभाय इंसानियत और अच्छाई का रिश्ता , अपनेपन और सच्चाई का रिश्ता , बिना राखी के बिना , बिना स्वार्थ के हमेशा जरुरत पड़ने पर लडकियों को सुरक्षा दे उन्हें सलामत घर तक पहुचाय और उनसे अपना रिश्ता निभाय :- फ़र्ज़ और जिम्मेदारी का रिश्ता |
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