जनता की आवाज़, सरकार की ज़िम्मेदारी
(This is answer of a question asked to me, I've summarised the way I've a answered.
सवाल: अगर सरकार आपको बुलाए और आपका दृष्टिकोण पूछे, तो क्या आप अपना विचार रखेंगे?
क्यों नहीं रखेंगे? बिल्कुल रखेंगे।
अगर सरकार किसी भी नागरिक से पूछे कि "हम क्या बेहतर कर सकते हैं?", "आपकी क्या राय है?", "आपके क्या सुझाव हैं?" — तो हर नागरिक को अपनी बात रखनी चाहिए।
और अगर सरकार न भी पूछे, तब भी नागरिकों को अपनी बात रखनी चाहिए।
हमने सरकार देश की भलाई के लिए चुनी है। लेकिन देश की भलाई तभी होगी, जब उसके नागरिकों की स्थिति बेहतर होगी।
असल समस्या यह है कि सरकार आम लोगों से पूछती ही नहीं कि उनकी ज़मीन पर वास्तविक स्थिति क्या है।
क्या स्वास्थ्य मंत्री आपसे पूछते हैं कि आपकी सेहत के लिए क्या बेहतर किया जा सकता है?
क्या शिक्षा मंत्री आपसे पूछते हैं कि आपके बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है और शिक्षा व्यवस्था में क्या कमियाँ हैं?
क्या वित्त मंत्री आपसे पूछते हैं कि आप हर महीने सिर्फ़ किसी तरह गुज़ारा कर रहे हैं या आगे बढ़ भी पा रहे हैं? आपके घर का खर्च कैसे चल रहा है?
हो सकता है उन्हें बहुत-सी बातें पता हों, लेकिन जब तक व्यवस्थित रूप से लोगों से डेटा नहीं लिया जाएगा, तब तक सही तस्वीर सामने कैसे आएगी?
और बिना डेटा के प्रभावी नीतियाँ कैसे बनेंगी?
आख़िरकार, अच्छी नीति का आधार डेटा ही होता है।
एक और महत्वपूर्ण बात है। जब हम वोट देते हैं, तो हम किसी पार्टी या गठबंधन को चुनते हैं। हम सीधे वित्त मंत्री, शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री या रेल मंत्री को वोट नहीं देते। हमें तो अक्सर यह भी नहीं पता होता कि किस मंत्रालय की ज़िम्मेदारी किसे मिलेगी।
सरकार बनने के बाद मंत्री पार्टी या सहयोगी दलों से बनाए जाते हैं।
लेकिन कई मामलों में जनता की भी स्पष्ट राय होती है कि किसी विशेष क्षेत्र को कौन सबसे बेहतर तरीके से संभाल सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण काम कर चुका है, तो जनता चाहेगी कि उसे शिक्षा मंत्रालय जैसी ज़िम्मेदारी मिले।
समस्या यह नहीं है कि लोगों के पास समझ नहीं है। समस्या यह है कि लोगों के पास व्यवस्था में प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने का अवसर नहीं है।
लोकतंत्र का अर्थ है — जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा चुना गया शासन।
लेकिन यदि सरकार लोगों की वास्तविक परिस्थितियाँ, चुनौतियाँ और सुझाव ही व्यवस्थित रूप से नहीं सुनेगी, तो बदलाव आएगा कैसे?
कोई एक अच्छा व्यक्ति पूरे देश की हर समस्या अकेले हल नहीं कर सकता।
इसलिए सिर्फ़ मीडिया का ही काम नहीं है कि वह सरकार से सवाल पूछे। लोकतंत्र में हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है कि वह प्रश्न पूछे, सुझाव दे और सरकार को जवाबदेह बनाए।
आखिर देश में नागरिकों को ये समझना ही होगा कि लोकतंत्र में जानत कि भूमिका सिर्फ वोटर बनने की नहीं बल्कि उसमें पूरी तरह भागीदार बनने की भी है।
- Yogesh Gendre
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