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Showing posts from December, 2019

सोच बदलो, देश बदलो

अंतरजातीय विवाह के नाम पर हमारे देश में आय दिन जो घटनाएं सुनने को मिलती है वह सच में निंदनीय है विश्व गुरु कहलाने वाले भारत के सभ्य और उन्नत लोगो द्वारा इस प्रकार की मानसिकता अनापेक्षित है, प्यार करना और और अपनी प्रेमिका या प्रेमी से शादी करना सर्वथा उचित तथा मानवीय है ,हां यह सत्य है की चाहे जो भी कारण हो ,जैसी भी परिश्थिति हो अपने परिवार और समाज की मर्यादाओ को लांघकर संकारो पर पानी नहीं फेरना चाहिए, प्यार नसीब से मिला एक खुबसूरत अहसास है .प्यार होने बाद नीरस सी ज़िन्दगी जीने वाले व्यक्ति को ज़िन्दगी जन्नत लगने लगती है, यह सच है की प्यार का पहला अहसास कभी नही भुला सकने वाला होता है और यह भी उतना ही सच है जाती ,धर्म और पारम्पिक सोच को आधार मानकर हमारे समाज में आज भी अलग जाती में प्रेमविवाह करने वालो को कई जगह प्रताड़ित किया जाता है जबकि कानून की नजरो में यह वैध और सामान्य है, लेकिन न जाने क्यों प्रगतिवाद और असीम संभावनाओं के साथ सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाते विश्व में हमारा सामाज निरर्थक वैचारिक बंदिशों में ही सिमट कर रह जाती है , जबकि वास्तविकता में शिक्षित सृजनात्म...

"Kab Tak" Rapes in india - Need to take strict Actions

कब तक...? हाल ही में देश में एक के बाद एक रेप की घटनाएँ सामने आई हैं। सवाल यह है — इनका जिम्मेदार कौन है? और सबसे बड़ा सवाल — ये सब हमारे समाज में कब तक चलता रहेगा? अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि अखबार में अगर कोई रेप की खबर दिख जाए तो हम बिना पढ़े ही पन्ना पलट देते हैं। क्योंकि अब हम थक चुके हैं — पढ़ते-पढ़ते, सुनते-सुनते, देख-देखकर। लेकिन फिर वही सवाल हमारे ज़ेहन में गूंजता है, एक शोर की तरह बाहर निकलता है — "आखिर ये सब कब तक चलेगा? कब तक?" हर बार एक ही सवाल... और एक ही जवाब मैं हमेशा एक ही सवाल करता हूँ और एक ही जवाब देता हूँ: सवाल: क्या इस बार भी हमें सिर्फ "न्याय का भरोसा" दिया जाएगा? और जब तक किसी और बहन के साथ वही हादसा न हो जाए, तब तक यह केस अदालतों में यूँ ही पड़ा रहेगा? इन दरिंदों के हौसले आखिर कब तक बुलंद होते रहेंगे? क्या हम सब, हमारे समाज, हमारी सुरक्षा व्यवस्था और हमारी मानसिकता भी इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं? क्या किसी लड़की के साथ बलात्कार होने के बाद, उसका आत्मदाह कर लेना केवल उसका फैसला होता है, या हमारे संकीर्ण और कठोर समाज की मानसिकता की देन है? यह ...